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जानिए : धनतेरस पूजन का शुभ मुहर्त और धनतेरस का महत्व

dhanteras shubh muhurat

धनतेरस का त्यौहार चूका है और ये त्यौहार पुरे भारत मई काफी हर्ष और उल्लास के साथ बनाया जाता है . क्या आप जानते है धनतेरस का महत्व ये त्यौहार क्यों बनाया जाता है ?. क्या है क्या है इसके पीछे का रहस्य ,इस दौरान काफी लोग अपने घर पर काफी बहुमूल्य वस्तुए ,बर्तन एवं कई प्रकार के गहने खरीद कर लाते है . धन तेरस पर आप यदि सोना, वाहन, भवन या कोई बहुमूल्य वस्तु खरीदने जा रहे है तो रुकिए! महत्व्यपूर्ण निवेश से पहले क्या करें। जिससे मिले लाभ।  कौन से मंत्र का करें जाप और क्यूं और कैसे करे यमदीप दान। हर राशी अनुसार उपाय जो बनाये धनतेरस को सफल समृद्ध पूरे वर्ष भर। क्या आपको आपको पता है? किस वस्तु को इस दिन खरीदना जयादा लाभकारी  होता है . क्या होता है इस दिन शुभ अशुभ  ? इस दिन किस वास्तु की खरीदारी आपके लिए शुभ रहेगी ? किस समय लगन पर क्या वास्तु खरीदनी है ? अगर आप ये सब बातें नहीं जानते है तो आज हम आपको इसके बारे में अच्छे से एक एक चीज़ की जानकारी देंगे 



क्यों भगवान धनवंतरी के पूजन का इतना महत्व :

धनत्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी जन्म हुआ था और इसीलिए इस दिन को धन तेरस के रूप में पूजा जाता है. दीपावली के दो दिन पहले आने वाले इस त्योहार को लोग काफी धूमधाम से मनाते हैं. इस दिन गहनों और बर्तन की खरीदारी जरूर की जाती है.   शास्त्रों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन को धन त्रयोदशी कहा जाता है. धन और वैभव देने वाली इस त्रयोदशी का विशेष महत्व माना गया है

कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय बहुत ही दुर्लभ और कीमती वस्तुओं के अलावा शरद पूर्णिमा का चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी के दिन कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धनवंतरी और कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को भगवती लक्ष्मी जी का समुद्र से अवतरण हुआ था. यही कारण है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन और उसके दो दिन पहले त्रयोदशी को भगवान धनवंतरी का जन्म दिवस धनतेरस के रूप में मनाया जाता है.

भगवान धनवंतरी को प्रिय है पीतल  भगवान धनवंतरी को नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है. इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे शंख और चक्र धारण किए हुए हैं. दूसरी दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश लिए हुए हैं. ऐसा माना जाता है कि यह अमृत कलश पीतल का बना हुआ है क्योंकि पीतल भगवान धनवंतरी की प्रिय धातु है.


मान्यता के अनुसार धनतेरस: 
मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु शुभ फल प्रदान करती है और लंबे समय तक चलती है. लेकिन अगर भगवान की प्रिय वस्तु पीतल की खरीदारी की जाए तो इसका तेरह गुना अधिक लाभ मिलता है.


यम दीपदान:
धनतेरस पर भगवान यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो धनतेरस के दिन दीपदान करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता। इस मान्यता के पीछे पुराणों में वर्णित कई कथा है। अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को धनतेरस के दिन पूजन और दीपदान विधिपूर्वक करना चाहिए। जहां यह पूजन होता है, वहां अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता। यदि आप आज संध्याकाल में घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक जलाएं तथा उस दीपक में दो काली गुंजा डाल दें तो वर्ष भर आपको आर्थिक, शारीरिक रूप से परेशानी नहीं होगी।



धनतेरस पूजन:

धन तेरस की पूजा शुभ मुहुर्त में करनी चाहिए. सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए. देव कुबेर का ध्यान करते हुए, भगवान कुबेर को फूल चढाएं और ध्यान करें, और कहें, कि हे श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले, गरूडमणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृ्त शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर का मैं ध्यान करता हूँ.

इसके बाद धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करें. और निम्न मंत्र का जाप करें.

'यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा '



धनतेरस का मुहूर्त : 



प्रदोष काल का समय 17:45 से 20:18 तक रहेगा, स्थिर लग्न 19:20 से 21:14 तक रहेगा. धनतेरस की पूजा के लिए उपयुक्त समय 19:20 से 20:17 के मध्य तक रहेगा.


धनतेरस में बरतन एवं आभूषण खरीदने का शुभ मुहूर्त….
दिल्ली, चेन्नई और चंडीगढ़ :- दोपहर 1 बजकर 28 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक का समय सबसे उत्तम है।
मुंबई में :- 1 बजकर 46 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट
कोलकाता में :- 12 बजकर 43 मिनट से 2 बजकर 5 मिनट तक का समय श्रेष्ठ है।



राशि अनुसार कब करें खरीददारी:

मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के लोग के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 01:50 से 03:20 बजे तक
वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए शुभ मुहूर्त शाम 03:20 से 04:50 बजे तक।
मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि वालों के लिए शुभ मुहूर्त- शाम 04:50 से 06:20 बजे तक
मेष, कर्क, तुला और मकर राशि वालों के लिए शुभ मुहूर्त- शाम 06:20 से 07:50 बजे तक
वृष लग्र (स्थिर लग्र)- सभी राशि वाले के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07:07 से 07:05 बजे तक

राशि के अनुसार धनतेरस पर क्या खरीदे:

मेष-
मेष राशि के जातक इस धन तेरस पर सोने की खरीदारी करने जा रहे हैं तो उससे पहले तांबे की वस्तु से खरीददारी शुरू करें। इस शुभ पर्व पर इस वर्ष आपके लिए भूमि, भवन में निवेश भी लाभ दायक होगा।
क्या करें-घर के मुख्य द्वार पर तेल के दीपक में दो काली कौड़ी डालें।
वृष-
स्वर्ण में या किसी बड़े निवेश से पूर्व (रजत) चांदी की कोई वस्तु (पात्र, मूर्ति) थोड़े से चावल की खरीददारी करना शुभ होगा।
क्या करें- दो कमलगट्टे खोये का मिस्ठान माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करें।
मिथुन-
स्वर्ण या किसी विशेष निवेश से पूर्व कांसे की गणेश जी की मूर्ति हंस का जोड़ा खरीदना चाहिए।
क्या करें-केले के दो पौधे रोपकर उनकी देखभाल करें तथा उनके फलों को नहीं खाएं।
कर्क-
धन तेरस के इस विशेष पर्व पर धन प्राप्ति के लिए आप स्फटिक या चांदी का श्री यंत्र खरीदें फिर कोई और खरीदारी करें तो आपके लिए अत्यंत शुभ और विशेष फल देने वाला रहेगा।
क्या करें-रात्रिकाल में भवन के पूजन स्थान पर रात्रि जागरण करें।
सिंह-
सिंह राशि वाले जातको कों तांबे का कोई पात्र खरीदकर स्वर्ण में निवेश अवश्य करें, इससे मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होगी।
क्या करें-आक की रूई का दीपक संध्या समय किसी तिराहे पर रखें।
कन्या-
कांसे हाथीदांत से बनी हुई वस्तु खरीद कर आप अपने गाढ़े धन का निवेश करेंगे तो निश्चित लाभ प्राप्त होगा।
क्या करें-बरगद से पांच फल लाकर उसे लाल चंदन में रंगकर नए लाल वस्त्र में कुछ सिक्कों के साथ बांधकर अपने घर अथवा प्रतिष्ठान में रखें।
तुला-
चांदी का श्री यंत्र, आभूषण या सिक्का अवश्य खरीदें फिर अन्य कोई निवेश करें, तब लाभ निश्चित है।
क्या करें-पीपल के पांच पत्ते लेकर उन्हें पीले चंदन में रंगकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें।
वृश्चिक-
तांबा, पंचधातु का पात्र या इनसे बना श्री यंत्र और स्वस्तिक ख़रीदे उसके साथ थोडा सा गेंहू, गुड़ घर लाये फिर कोई अन्य खरीददारी या निवेश करें।
क्या करें-संध्या समय पीपल वृक्ष के समीप तेल का पंचमुखी दीपक जलाएं।


धनु-
थोड़ी सी केसर, हल्दी अवश्य ख़रीदे, फिर अगर सोना खरीदना ही है तो भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की सोने की मूर्ति खरीदें या अपनी पसंद के आभूषण भी ले सकते हैं।
क्या करें-गुलर के ग्यारह पत्तों को मोली से बांधकर यदि किसी वट वृक्ष पर बांधे तो आर्थिक कष्ट से मुक्ति होकर सम्पन्नता मिलेगी।
मकर-
मकर राशि वाले जातक सर्वप्रथम घर की सजावट हेतु कोई भी सामान अवश्य खरीदें, फिर अपनी रूचि अनुसार निवेश करें तो लाभ मिलेगा।
क्या करें-व्यवसाय में हानि से बचने हेतु गाय को चारा डालें।
कुंभ-
आप लोहे की कोई वस्तु के साथ यदि नीलम खरीदें फिर विद्युत उपकरण, भवन, भूमि, वाहन, स्वर्ण आदि में निवेश करें तो लाभ मिलेगा।
क्या करें-यदि एकांत स्थान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल वृक्ष पर चढ़ाएं, तिल के तेल का दीप अर्पित करें तो कर्जमुक्त हो सकते हैं।
मीन-
घर के सौंदर्य में वृद्धि करने वाली वस्तुओं की खरीदारी से प्रारंभ कर यदि निवेश किया तो लाभ अवश्य मिलेगा।
क्या करें-संध्याकाल में लक्ष्मीजी के मंदिर में नारियल, चुनरी, मिश्री चढ़ाएं।



ये जानकारी अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ जरूर करे ,ताकि वो भी अपनी दीपावली हर्ष और उल्लास के साथ शुभ मुहर्त पर बना सके 

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